
“स्किल से स्टार्टअप” का मॉडल हो सकता है उत्तर प्रदेश
Updated on : 11 Sept 2018
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को आसान शब्दों में परिभाषित करने के लिए कहा जा सकता है “ यह नौकरी दिलाती है”। जाहिर है नौकरियां उतनी नहीं हैं, जितने उम्मीदवार इसलिए तमाम प्रयोगों, शोधों (रिसर्च) और निष्कर्षों से इसमें स्वरोजगार के अपेक्षाकृत कम प्रचारित पहलू को उभारा गया। अब कौशल विकास को “नौकरी का निर्माण करने वाली योजना” भी कहा जा सकता है। नेशनल स्किल डवलपमेंट कारपोरेशन (एनएसडीसी) ने ‘निर्वाणा प्रोजेक्ट’ को लांच कर रोजगार तलाश रहे युवाओं की भीड़ को रोजगार देनेवालों के समूह में बदलने का भरोसा दिया है। निर्वाणा एनएसडीसी के ट्रेनिंग सेंटर्स के युवाओं को आसान लोन लेने और चुकाने की बिल्कुल ही अनोखी सुविधा है जो निम्नआय वर्ग को खुद का कारोबार करने का आत्मविश्वास देती है। हिंदीभाषी राज्यों में नौकरी की मानसिकता को स्टार्टअप और आन्त्रोप्रेन्योरशिप की ओर ले जाने नए आयाम समायोजित किए गए हैं, इनमें युवाओं को आकर्षित करनेवाली सरलता और व्यवहारिकता है।
नेशनल स्किल डवलपमेंट कारपोरेशन (एनएसडीसी) लगातार ‘स्किल इंडिया’ के व्यवहारिक पहलुओं पर काम कर रहा है। कौशल विकास कार्यक्रम को अधिक ‘प्रैक्टीकल’ बनाया जा रहा है। स्किल की ट्रेनिंग को एक बने-बनाए औपचारिक ढांचे की तरह थोपा नहीं जाएगा। उत्तर प्रदेश में स्किल इंडिया मिशन का विस्तार इसकी झलक दिखाता है। विशेषज्ञ उत्तर प्रदेश में बनी नई राजनीतिक परिस्थिति को स्किल इंडिया मिशन के अनुकूल मान रहे हैं । इस संदर्भ में एनएसडीसी ने यूपी में मजबूत होमवर्क किया है।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का मुख्य लक्ष्य दसवीं और बारहवीं की कक्षाओं तक पढ़कर पढ़ाई छोड़ देनेवाले युवा हैं, इसलिए एनएसडीसी ने अपने प्रशिक्षण साझेदारों के माध्यम से प्रक्रिया को सरल बनाया है। यह नहीं है कि सरल प्रक्रिया केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित है, यह फार्मूला देशभर में अपनाया गया है लेकिन उत्तर प्रदेश में आबादी के मुकाबले रोजगार के साधन ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ हैं तो वहां कार्यक्रम क्रियान्वयन के मापदंड भी उसी मुताबिक हैं। संभव है कि स्किल इंडिया के लिए उत्तर प्रदेश मॉडल स्टेट बन जाए। इसकी तैयारी भी दिखाई देती है। उत्तर प्रदेश में एनएसडीसी के लगभग 1400 ट्रेनिंग सेंटर्स हैं जो आईसेक्ट (AISECT) और अमास (AMASS) जैसे सफल संस्थानों से जुड़े हैं। आईसेक्ट को परिचय की जरूरत नहीं है, वह संसाधनों से परिपूर्ण एनएसडीसी का सबसे बड़ा ट्रेनिंग पार्टनर है। वहीं अमास की उत्तर प्रदेश में उल्लेखनीय उपस्थिति है।
1 . कौशल मेले आयोजित कर युवाओं को जुटाना। यह कुशलता विकास कार्यक्रम के प्रसार का सबसे कारगर साबित हुआ है अब तक।
2. पीएमकेवीवाय द्वारा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्रों में पसंद का पाठ्यक्रम चुनने की सुविधा। एक तरह से यह प्रशिक्षण केंद्रों में युवाओं को विषय चयन की स्वतंत्रता है। प्रक्रिया के सरलीकरण को ध्यान में रखकर ही 08800-55555 नंबर जारी किया गया है, जो युवाओं को अपने क्षेत्र में प्रशिक्षण केंद्र तलाशने की आसानी के लिए है। एनएसडीसी की वेबसाइट में चैट की सुविधा भी है। स्किल इंडिया ने युवाओं को अपनी विशेषता बताने के लिए सूत्र वाक्य रखा है- “ अपनी पसंद के उस पाठ्यक्रम में प्रवेश पाएं जिसके लिए आप योग्य हों” । देश की हिंदी बेल्ट में उत्तर प्रदेश का सार्वभौमिक प्रभाव है। कुशलता विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने सबसे बड़ी आबादी के इस प्रदेश में जुलाई 2015 से पैन इंडिया की पहल की थी। यह एक प्रयोग था जिसे शानदार प्रतिसाद मिला। पैन इंडिया की संभावनाओं के सामने भीड़ अनुमान से कहीं ज्यादा थी, इसलिए आगे इसे चरणबद्ध तरीके से सुचारू रखने का खाका तैयार किया गया और अब उत्तर प्रदेश से ही मिले फीडबैक के आधार पर “स्किल इंडिया” का बिल्कुल ही
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