
स्थानीयता प्राथमिकता है एनएसडीसी के प्रशिक्षण में
Updated on : 11 Sept 2018
सबका साथ- सबका विकास की थीम पर नेशनल स्किल डॅलवपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) अब स्वयं की संचालन व्यवस्था को विकेंद्रीकृत कर रहा है। कुशलता विकास के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने राज्यों की सामाजिक, भौगोलिक और मानसिक परिस्थितियों-स्थितियों के आधार पर सिस्टम बनाया जा रहा है। एनएसडीसी के सीईओ और एमडी मनीष कुमार का कहना है कि स्किल इंडिया मिशन का अर्थ केवल दिल्ली से संचालित महत्वाकांक्षी योजना नहीं है, देश के सामने इसकी साफ तस्वीर रखनी है। उनके शब्दों में “ हम मणिपुर और केरल को एक ही चश्मे से नहीं देख सकते”।
कुमार के ऐसा कहने के पीछे अनेक कारण हो सकते हैं, पर जो पहली वजह दिखाई देती है उसमें स्थानीयता सबसे बड़ा मुद्दा है। स्थानीय विशेषताएं रोजगार के अवसर बनाती हैं जिन्हें निखारकर विकसित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्किल इंडिया अभियान की शुरुआत करते हुए कहा था कि जिस तरह चीन विनिर्माण में वैश्विक कारखाना बन गया है, उसी प्रकार भारत को दुनिया के मानव संसाधन केंद्र के रूप में उभरना चाहिए। श्री मोदी ने यह भी कहा था कि लोगों की क्षमता को समुचित और बदलते समय की आवश्यकता अनुसार कौशल प्रशिक्षण देकर उभारा जाता है तो भारत के पास दुनिया का 4 से 5 करोड़ कार्यबल उपलब्ध होगा।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान 10 साल की समय सीमा रखने का सुझाव दिया था। एनएसडीसी ने इसे ही डेडलाइन माना है। उसके लिए बड़ी मसला राज्यों से समन्वय स्थापित करने की है। केंद्र सरकार से राजनीतिक तालमेल नहीं रखनेवाले राज्यों में अभियान के विस्तार में आ रही दिक्कतें विषय नहीं है। लोगों का भरोसा जीतना ज्यादा जरूरी है। एनएसडीसी ने अपने ट्रेनिंग प्रोग्राम स्थानीय अभिरूचियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किए हैं।
इस पर मनीष कुमार कहते हैं “ आप दबाव डालकर या सपने दिखाकर मानव संसाधन का विकास नहीं कर सकते। हमें जानना होगा कि हमसे जुड़नेवाला हरेक व्यक्ति भविष्य में खुद को कहां देखना चाहता है”।
कुमार ने मणिपुर का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां किस प्रकार उग्रवाद से मुक्त हुए लोगों की मानसिकता को समझकर प्रशिक्षण कार्यक्रम डिजाइन किया गया। उन्हें पहले मुख्यधारा में आने प्रेरित किया गया और फिर उनसे ही पूछा गया कि आप किस तरह का कार्य अपनी आजीविका के लिए करना चाहते हैं। एनएसडीसी को इसमें राज्य सरकार और पुलिस व सेना का साथ मिला। समर्पण कर चुके व्यक्तियों को विद्युत वितरण कार्य के प्रशिक्षण में सफलता मिली। स्वयं मुख्यमंत्री ने उन्हें सर्टीफिकेट बांटे और रोजगार का आश्वासन दिया।
खास यह भी था कि उग्रवादी पृष्ठभूमि के कारण प्रशिक्षुओं को जब प्रशिक्षण के स्थान में असहजता महसूस हुई तब प्रशिक्षण केंद्र को पुलिस मुख्यालय परिसर में शिफ्ट कर दिया गया। एनएसडीसी के किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम की यह अभूतपूर्व सफलता रही। इसने एनएसडीसी टीम की प्लानिंग को मिसाल बना दिया।
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